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राष्ट्र भाषा का संवैधानिक दर्ज़ा – बिजय कुमार जैन

14543659_373577609697266_3251738482288026132_oराष्ट्र भाषा का संवैधानिक दर्ज़ा – बिजय कुमार जैन संस्थापक हिंदी वेलफेयर ट्रस्ट

एक परिचय – बिजय कुमार जैन
हिंदी वेलफेयर ट्रस्ट के संस्थापक बिजय कुमार जैन विगत 36 वर्षों से हिंदी पत्रकारिता के माध्यम से देश, धर्म, समाज एवं राजनीति की सेवा में संलग्न है|
श्री जैन ने अपनी पत्रकारिता यात्रा ‘ईस्ट वेस्ट अँधेरी टाइम्स’ के प्रकाशन – संपादन से आरंभ की थी, जो वर्तमान में वे भी तीन पत्रिकाओं का संपादन कर रहे हैं |
१. जिनागम पत्रिका : जैन समाज के विभिन्न पंथों एवं सम्प्रदायों में एकता स्थापित करने के उददेश्य से 19 वर्ष पूर्व श्री जैन ने ‘जिनागम’ पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया, समाज के सभी वर्गों के समर्थन के साथ-साथ श्री जैन की पहल को धर्माचार्यों एवं गुरु-भगवन्तों के आशीर्वाद मिले, आज ‘जिनागम’ लोकप्रियता के पथ पर निरंतर अग्रसर है |
२. मेरा राजस्थान : धर्म के साथ अपनी जन्मभूमि के प्रति भी दायित्व निर्वाह की भावना से १० वर्ष पूर्व श्री जैन ने ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया | इस पत्रिका के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी को वे अगवत करा रहे हैं |
ऐतिहासिक रथयात्रा :  राजस्थानी को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करने के उददेश्य से श्री जैन ने 19 जुलाई, 2015 को मुंबई से दिल्ली तक रथयात्रा का आयोजन किया, कई दृष्टियों से यह रथयात्रा ऐतिहासिक साबित हुई |
३. मैं भारत हूँ : अपने धर्म एवं प्रदेश के पश्चात श्री जैन ने भारत, भारतीयता और भारतीय संस्कृति की ओर ध्यान केंद्रित किया, अपनी भावना को आकार देने हेतु उन्होंने 6 वर्ष पूर्व ‘मैं भारत हूँ’ पत्रिका का शुभारंभ किया, आज यह पत्रिका राजनीति क्षेत्र में अत्यंत लोकप्रिय है, और हिंदी बने राष्ट्रभाषा के लिए प्रयास रत कार्यों को प्रकाशित कर रही है – गेलार्ड ग्रुप
हिंदी बने राष्ट्रभाषा
अपने साढ़े तीन दशकों के पत्रकारीय जीवन में श्री जैन ने एक बात बड़ी तीव्रता से अनुभव की कि विदेशी दासता से मुक्त होने के 70 वर्षों बाद भी भारत की अपनी कोई संवैधानिक राष्ट्रभाषा नहीं है | श्री जैन का दृढ़ मत है कि हिंदी ही भारत की सर्वमान्य राष्ट्रभाषा होने की अधिकारिणी है और इस नाते उसे संवैधानिक रूप से राष्ट्रभाषा की मान्यता मिलनी चाहिए | स्वयं एक मीडियाकर्मी होने के नाते श्री जैन ने अनुभव किया कि यह कार्य जन-जागरण से ही संभव हो सकता है और इसके के लिए मीडिया के समस्त रूपों का सहयोग आवश्यक ही नहीं, बल्कि अनिवार्य है |
अतः वर्तमान में मीडिया के तीन महत्वपूर्ण प्रकारों प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया को जोड़ने की भावना से श्री जैन ने इस जनजागरण अभियान को सूत्रवाक्य दिया.
“हिंदी को मिले राष्ट्रभाषा का सम्मान
यह है हम पत्रकारों का अभियान”
श्री जैन को इसके लिए मीडिया के वरिष्ठ व्यक्तित्वों से उत्साहजनक प्रतिक्रियाएँ मिल रही है, सब का मत है कि संवैधानिक मान्यता दिलाने के संकल्प पर समस्त मीडिया का एकमंच पर आना स्वागत योग्य और ऐतिहासिक घटना होगी |
गेलोर्ड ग्रुप
मुम्बई

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