भारत के हर नागरिक को अन्ना बनना होगा तब सम्पूर्ण राष्ट्र का निर्माण होगा

रालेगणसिद्धि: ‘समस्त भारतीय भाषाओं का बरकरार रहे सम्मान, और हिंदी को मिले राष्ट्रभाषा का सम्मान’ इस भावना के लिए चल रहे अभियान को लेकर भारतीय संस्कार संस्कृति के सेवक महाराष्ट्र स्थित अन्ना हजारे के निवास स्थल रालेगणसिद्धि में २७ नवम्बर, २०१६ को पहुंचे, अन्ना के दर्शन कर अपनी सभी भावनाओं को बताया कि हिंदी के साथ सभी भारतीय भाषाओं के अस्तित्व से जुड़ी समस्याओं किस प्रकार हाशिए पर पहुंच गई है, भारतीय संस्कृति का भविष्य खतरे में है, जिस प्रकार आपने भ्रष्टाचार के साथ १७ अंदोलनों में सफलता पाई, आपके द्वारा किए गये कार्यों से भारत का विश्व में सम्मान बढ़ा, इसलिए आप भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए आगे आएं, सम्पूर्ण भारत में चल रहे ‘भारतीय भाषा अपनाओ अभियान’ में अग्रणीय होकर मार्गदर्शन दें, अभियान का नेतृत्व करके राष्ट्रभाषा को पूर्ण आजादी मिल सके के सेनापति बनकर हम सिपाहियों को निर्देश करें, ताकि हम अपने भारत को पूर्ण आजादी दिला सकें, क्योंकि जिस देश की भाषा नहीं होती वह गूंगा होता है, 
यह नारा महात्मा गांधी जी ने राष्ट्र को दिया था, राष्ट्र का पूर्ण निर्माण तभी हो सकता है जब राष्ट्र के लिए समर्पित भाव-भूमि व भाषा हो, आज राष्ट्र के पास भाव-भूमि तो है पर भाषा (राष्ट्र) नहीं है जबकि राष्ट्रभाषा भारत की हिंदी ही हो सकती है, अन्ना आप हमारे भारत की आवाज ‘हिंदी’ को सम्मान दिलवायें। अन्ना हजारे ने सभी बातें बड़े ही ध्यान से सुनी और यह कहा कि भारत के हर नागरिक को अन्ना बनना होगा, ईमानदारी से अपनी संस्कृति संस्कार सभ्यता व इतिहास के रक्षार्थ कार्य करना होगा, आप सभी हमारे कार्यालय में जाकर सारी फाइलें जमा करवा दें, विचार करता हूं क्या करना चाहिए?
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मुम्बई से बिजय कुमार जैन एवं एम.एल. गुप्ता, इंदौर से निर्मल कुमार पाटोदी और हुबली-कर्नाटक से राहुल खाटे अन्ना हजारे के कार्यालय पहुंचे, वहां संजय पठारे से मुलाकात की और सभी बातें बतायी, अन्ना के निर्देश बताए, दिल्ली से डॉ. वेदप्रताप वैदिक से राष्ट्रीय भाषा अभियान के कार्यों की चर्चा मोबाईल पर करवायी, साथ ही सभी जानकारी श्री पठारे को दी गई तो श्री पठारे ने कहा कि भारतीय संस्कृति का भविष्य बचाना बहुत ही जरूरी है, हमारी मराठी भी मरती जा रही है, स्कूलों में बच्चे मराठी भाषी होने के बावजूद मराठी न पढ़कर विदेशी भाषा अंग्रेजी पढ़ने में मशगूल हैं, भारतीय संस्कृति का भविष्य बहुत ही खराब है, मैं पूरी कोशिश करुंगा कि अन्ना इस भारतवर्षीय अभियान से जुड़ें और १० जनवरी, २०१७ ‘विश्व हिंदी दिवस’ पर ‘राष्ट्रभाषा-रेलयात्रा’ में शामिल हों, क्योंकि अन्ना ने जीवनभर भारतीय संस्कृति की रक्षार्थ ही कार्य किया है। करीब १ घंटे विस्तारपूर्वक चले संवाद के पश्चात सभी भारतीय संस्कृति के सिपाही मुम्बई की ओर रवाना हो गए।

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