परिचय – डॉ.एम.एल. गुप्ता “आदित्य“

पूरा नाम : 

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’

 

पता    :

ए-104, चंद्रेश हाइट्स जैसल पार्क, भायंदर (पूर्व), मुंबई-401105

1 केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद,मुंबई

(सदस्य)

वर्षों तक केंद्रीय कार्यालयों में हिंदी का प्रयोग व प्रसार बढ़ाने के लिए परिषद की गतिविधियों में सक्रियतापूर्वक कार्य करते हुए केंद्रीय कार्यालयों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाने हेतु  कार्य।
2 आशीर्वाद

(कार्यकारिणी सदस्य)

एक दशक से अधिक समय तक केंद्रीय कार्यालयों में हिंदी का प्रयोग व प्रसार बढ़ाने की दृष्टि से संस्था द्वारा आयोजित संगोष्ठियों का संचालन किया और गतिविधियों में सहयोग।
3 हिंदी प्रचार एवं शोध संस्धान

(महासचिव)

संस्था की स्थापना में प्रमुख भूमिका व संस्थापक महासचिव। संस्था द्वारा हिंदी भाषा व साहित्य के विभिन्न कार्यक्रमों का सफल आयोजन । संस्था द्वारा प्रतिमाह साहित्यिक संगोष्ठी भी आयोजित की जाती है।
4

वैश्विक हिंदी सम्मेलन

3. सरकारी व निजी क्षेत्र की कंपनियों, उद्योगों आदि से ग्राहकों को हिंदी व भारतीय भाषाओँ में जानकारी देने का अनुरोध।

4. उक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए समूह के सदस्यों द्वारा प्रदत्त उपयोगी (अध्यक्ष)

1.वैश्विक हिंदी सम्मेलन के माध्यम से सोशल मीडिया यानि वैबसाइट,

गूगल समूह, फेसबुक समूह के माध्यम से प्रतिदिन देश-विदेश के

हजारों लोगों के बीच सामंजस्य व समन्वय बनाते हुए हिंदी के प्रयोग

व प्रसार के लिए सभी स्तरों पर सक्रिय प्रयास ।

2. इसके लिए भाषा प्रौद्योगिकी की नवीनतन प्रविधियों की जानकारी

देना व जागरूकता अभियाऩ व उसका प्रसार।

3. वैश्विक गूगल समूह के माध्यम से ई-संगोष्ठियों के आयोजन की अभिनव पहल। सूचनाओं का वैश्विक प्रसार।

5. वैश्विक सम्मेलनों व संगोष्ठियों का आयोजन ।

6. हिंदी भाषा-साहित्य व अन्य भारतीय भाषाओं के लिए विदेशों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे व्यक्तियों का ‘हिंदी के विश्वदूत’ तथा भारत में हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के लिए उल्लेखनीय योगदान  देनेवालों का ‘भारत-भाषा प्रहरी’ के रूप में विश्व को परिचित करवाने का कार्य ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हो सकें। व इस क्षेत्र में कार्य करनेवालों का प्रोत्साहन मिल सके।


हिंदी व अन्य भाषाओँ के प्रसार हेतु भाषा – प्रौद्योगिकी के प्रसार हेतु किए गए कार्य :-

1 भारत सरकार, गृह मंत्रालय के अंतर्गत उपनिदेशक,कार्यान्वयन के रूप में कार्य करते हुए पश्चिम क्षेत्र स्थित विभिन्न केंद्रीय कार्यालयों, बैंकों व स्वायत्त संस्थानों आदि की बैठकों, संगोठियों, सम्मेलनों व निरीक्षणों आदि में हिंदी के प्रयोग व प्रसार हेतु भाषा-प्रौद्योगिकी की जागरूकता व प्रौद्योगिकी की आवश्यकता व उपलब्धता की जानकारी व संघ की राजभाषा नीति के अनुपालन हेतु नियमों व व्यवस्था के संदर्भ में कार्यान्वय पर नियमित रुप से विशेष जोर दिया गया।
2. भारत सरकार, गृह मंत्रालय के अंतर्गत उपनिदेशक,कार्यान्वयन, के रूप में कार्य करते हुए हिंदी के प्रयोग व प्रसार हेतु पश्चिम क्षेत्र स्थित नगरों में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के माध्यम से एक अभियान के रूप में भाषा-प्रौद्योगिकी की जागरूकता व केंद्रीय कार्यालयों व स्थानीय शिक्षण संस्थानों को साथ लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन पर जोर दिया गया
3. ‘मुंबई हिंदी सम्मेलन’ जो बाद में ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ हो गया उसके सोशल मीडिया समूहों यानि गूगल समूह, फेस बुक समूह और बाद मे गूगल+ आदि के माध्यम से भी 2012 से निरंतर कंप्यूटर तथा मोबाइल आदि पर हिंदी में कार्य करने का आग्रह तथा कार्य करने संबंधी अद्यतन जानकारी दी जाती रही है। बड़ी संख्या में लोगों को ई मेल तथा फोन द्वारा भी उक्त जानकारी दी जाती रही है, जिसके परिणामस्वरूप जो लोग पहले रोमन लिपि में काम करते थे अब वे देवनागरी में काम करने लगे हैं।
4 ज्यादातर सरकारी व निजी कंपनियाँ ऐंटरप्राइज सॉफ्यवेयरों के माध्यम से काम करने लगी हैं जो कि प्राय: अंग्रेजी के लिए हैं उनके हिंदी व द्विभाषीकरण की आवश्यकता के संबंध में ग्राहक सेवा व जनसूचना की दृष्टि से सरकारी व निजी स्तर पर जागरूकता व अद्यतन प्रौद्योगिकी की जानकारी के लिए प्रयास किए गए।
5 9वें विश्व हिंदी सम्मेलन में (जोहांसबर्ग) में ‘हिंदी के लिए भाषा-टेक्नोलॉजी का सामर्थ्य’ विषय पर

आलेख वितरित किया गया।

6 विश्व हिंदी पत्रिका- 2012 में ‘हिंदी के प्रयोग व प्रसार की प्रमुख चुनौती: भाषा-प्रौद्योगिकी’  विषय पर आलेख प्रकाशित।
7 विश्व हिंदी संस्थान, कनाडा से प्रकाशित ई पत्रिका ‘प्रयास’ में 2013 में ई.आर.पी. सॉफ्यवेयर संबंधी लेख ‘हिंदी को कार्पोरेट जगत की भाषा कैसे बनाएँ ?’ विषय पर लेख प्रकाशित ।
8 भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा प्रकाशित’ – ‘राजभाषा भारती’ (अक्तूबर-दिसंबर-2014) अंक-141 में ‘भाषा-प्रौद्योगिकी तथा एंटरप्राइज सॉफ्टवेयरों में हिंदी की प्रगति’ विषय पर लेख प्रकाशित।
9 शिक्षा –संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित ‘भारतीय भाषा सम्मेलन’ में मुद्रित बुलेटिन के माध्यम से प्रतिभागियों को भाषा-प्रौद्योगिकी संबंधी सुझाव प्रस्तुत ।
10 मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी अध्ययन मंडल (बोर्ड ऑफ स्टडीज) के सदस्य के रूप में पाठ्यक्रम में “अनुवाद

तथा भाषा प्रौद्योगिकी” के लिए विशेष पाठ्यक्रम तैयार करने तथा वर्तमान पाठ्यक्रमों में भी भाषा प्रौद्योगिकी के समावेश का कार्य किया गया।

11 न्यू इंडिया ऐश्योरेंस कंपनी द्वारा ‘साइबर जगत व हिंदी’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का संयोजन-संचालन ।
12 वैश्विक हिंदी सम्मेसन की ओर से भाषा-प्रौद्योगिकीविद् बालेन्दू शर्मा दाधीच को वर्ष-2014 के लिए ‘भाषा-प्रौद्योगिकी’ सम्मान प्रदान किया गया।
13 ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के माध्यम से विद्यालय व महाविद्यालय स्तर पर में भारतीय भाषाओं हेतु प्रौद्योगिकी की जानकारी व प्रशिभण तथा सूचना-प्रौद्योगिकी (IT) शिक्षा में भारतीय भाषाओँ के समावेश की निरंतर माँग ।
14 ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के माध्यम से जनसेवा व जनसूचना के लिए ऑन लाइन सेवाएं-सुविधाएँ, क्प्यूटर-प्रणालियों से सृजित कार्यप्रणालियों, डिजिटल प्रणाली आदि में तथा  वैबसाइट आदि में हिंदी अथवा द्विभाषिक सुविधा/व्यवस्था की निरंतर माँग।


सम्मेलनों व संगोष्ठियों का आयोजन :-

1 संयुक्त क्षेत्रीय, राजभाषा सम्मेलन, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग उपनिदेशक कार्यान्वयन के रूप में पांच क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलनों का आयोजन तथा अनुसंधाऩ अधिकारी (कार्यान्वयन) के रूप में पांच क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलनों के आयोजन में सक्रिय सहयोग ।
2 मुंबई हिंदी सम्मेलन – 2012 मुंबई के राजभाषा, साहित्य, शिक्षा , मीडिया, सिनेमा, विज्ञापन आदि सभी क्षेत्रों व हिंदी सेवी संस्थाओँ को मिलाकर हिंदी के प्रयोग-प्रसार के लिए 2012 में मुंबई हिंदी सम्मेलन का आयोजन।
3 वैश्विक हिंदी सम्मेलन- 2014 10 सितंबर 2015 को मुंबई में वैश्विक हिंदी सम्मेलन- 2014 का आयोजन । सम्मेलन में गोवा की राज्यपाल मा.श्रीमती मृदुला सिन्हा, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती जयंती बेन मेहता, गोवा की मुख्य सूचना आयुक्त श्रीमती लीना मेहेंदले, अपर पुलिस महानिदेशक श्री एस.पी. गुप्ता, मा.लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति मा. कुठियालाजी तथा शिक्षा, साहित्य, भाषा-प्रौद्योगिकी व हिंदी व भारतीय भाषाओंके लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं सहित देश-विदेश के 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
4 वैश्विक हिंदी संगोष्ठी का आयोजन 10 जन. 2015 को विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित। जिसमें मॉरीशस के हिंदी साहित्यकार राज हीरामन सम्मानित
5 वैश्विक हिंदी संगोष्ठी का आयोजन 17 जनवरी 2015 को साहित्यिक पत्रिका प्रयास के संपादक तथा विश्व हिंदी संस्थान, कनाडा के संस्थापक हिंदी साहित्यकार प्रो. सरन घई के सम्मानार्थ कार्यक्रम आयोजित जिसमें में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति श्री     तथा सुप्रसिद्ध फिल्मकार श्री राजकुमार बड़जात्या सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित थे।

सम्मान / प्रशस्ति / पुरस्कार :-

1 सचिव, भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा पश्चिम क्षेत्र में राजभाषा हिंदी का प्रयोग बढ़ाने के सराहनीय प्रयास के लिए विशेष रूप से प्रशस्ति पत्र जारी ।
2 ‘आशीर्वाद’ ( साहित्यिक-सामाजिक व हिंदी सेवी संस्था) द्वारा प्रथम “राजभाषा श्री” सम्मान ।
3 ‘मीरा-भायंदर नागरिक परिषद’ (साहित्यिक-सामाजिक व हिंदी सेवी संस्था)  द्वारा “राष्ट्रभाषा रत्न सम्मान“
4 विश्व हिंदी संस्थान, कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन द्वारा कनाडा द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मानित ।
5 विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी संस्थानों द्वारा अनेक अवसरों पर हिंदी भाषा-साहित्य के प्रचार-प्रसार हेतु सम्मानित ।

विशेष दायित्व :-

1 सदस्य, अध्ययन मंडल (बोर्ड ऑफ स्टडीज), हिंदी, मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई । 

अन्य :-

1 भारत सरकार, गृह मंत्रालय के अंतर्गत उपनिदेशक – कार्यान्वयन, पश्चिम क्षेत्र, के रूप में संघ शासित क्षेत्र ‘दमण और दीव तथा दादरा नगर हवेली’ को राजभाषा नियम 1976 के अंतर्गत ‘ग’ क्षेत्र से ‘ख’ क्षेत्र में ले जाने का प्रस्ताव किया और 1987 के बाद पहली बार वर्ष 2012 में राजभाषा नियमों में संशोधन हुआ और अब ‘दमण और दीव तथा दादरा नगर हवेली’ ‘ख’ क्षेत्र में है।
2 तत्पश्चात गोवा राज्य को भी राजभाषा नियम 1976 के अंतर्गत ‘ग’ क्षेत्र से ‘ख’ क्षेत्र में ले जाने का प्रस्ताव

रखा गया । मामला अभी भी भारत सरकार व गोवा सरकार के बीच प्रक्रियाधीन है।

3 भारत सरकार, गृह मंत्रालय के अंतर्गत उपनिदेशक – कार्यान्वयन, पश्चिम क्षेत्र, के रूप में  कार्य करते हुए

विभिन्न केंद्रीय कार्यालयों, बैंकों व स्वायत्त संस्थानों में हिंदी के प्रयोग व प्रसार हेतु सक्रिय कार्य तथा भाषा-

प्रौद्योगिकी की जागरूकता व प्रौद्योगिकी की स्वीकार्यता के लिए विशेष प्रयास।

4 सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओँ के प्रयोग व प्रसार के लिए नियमित अभियान

चलाया जाता तथा विषय से संबंधित जानकारियों का आदान-प्रदान किया जाता है।

5 जोहान्सबर्ग में आयोजित 9वें विश्व हिंदी सम्मेलन में निजी खर्च पर सहभागिता तथा भारतीय भाषाओं के

प्रयोग-प्रसार हेतु ‘भाषा-प्रौद्योगिकी’ संबंधी सुझाव प्रस्तुत। साथ ही डरबन में हिंदी शिक्षा संघ व महात्मा गांधी

से जुड़े संस्थानों का दौरा। हिंदी शिक्षा संघ व वहाँ के भारतवंशियों से से निरंतर समन्वय बना हुआ है।

6 2015 में भोपाल में आयोजित भारतीय भाषा सम्मेलन में सहभागिता तथा हिंदी के प्रयोग व प्रसार हेतु

बिंदुवार सुझाव प्रस्तुत किए।

7 उक्त भारतीय भाषा सम्मेलन द्वारा भारतीय भाषाओं के लिए गठित विशेष समूह की बैठक में सहभागिता तथा भारतीय भाषाओं के प्रयोग व प्रसार हेतु सुझाव प्रस्तुत ।
8 दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थीकाल में भारतीय भाषाओँ के शिक्षण में अंग्रेजी माध्यम की अनिवार्यता

समाप्त करने की माँग । ।

9 दिल्ली विश्वविद्यालय की स्नातकोत्तर सांध्य शिक्षा में सांस्कृतिक सचिव। इसके पूर्व स्नातक स्तर पर शिवाजी महाविद्यालय के Out Standing Social Worker पुरस्कार से सम्मानित ।

व्याख्यान /कार्यक्रम/ संगोष्ठी :-

1 विभिन्न सरकारी/ गैर सरकारी संस्थाओं, संस्थानों में उच्च स्तरीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों का संचालन तथा  उच्च स्तरीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों, कार्यशालाओं आदि में अनगिनित व्याख्यान।
2 आकाशवाणी व दूरदर्शन पर अनेक कार्यक्रम, वार्ताएँ, साक्षात्कार , कविता, व्यंग्य आदि प्रसारित ।
3 पिछले 15 वर्षों से निरन्तर उच्च स्तरीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों, कार्यक्रमों का संचालन ।

प्रकाशन/ लेखन/ साहित्यकर्म :-

1 देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में विविध विषयों पर बड़ी संख्या में लेख प्रकाशित। हिंदी टी.वी/सिनेमा से संबंधित विषयों पर अनेक लेख प्रकाशित ।
2 अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका (विश्व हिंदी पत्रिका) राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं सहित अनेक कार्यालयीन पत्रिकाओं में भाषा, राजभाषा नीति व भाषा-प्रौद्योगिकी पर अनेक लेख प्रकाशित।
3 राजभाषा संदर्शिका का प्रकाशन ।
4 आकाशवाणी सहित अनेक मंचों पर कविता-पाठ तथा अनेक पत्र-पत्रिकाओं व वैबसाइट आदि पर कविताएं प्रकाशित।
5 कवि सम्मेलनों, काव्य गोष्ठियों में समसामयिक विषयों पर कविता पाठ ।

शिक्षा :-

1 एम.ए. हिंदी

1986

दिल्ली विश्वविद्यालय
2 बी.एड.

1989

महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक, हरियाणा
3 पीएच.डी.

 

1991

मुंबई विश्वविद्यालय

(विषय – राजभाषा के संवैधानिक प्रावधानों के परिप्रेक्ष्य में हिंदी के प्रचार-प्रसार का मूल्यांकन)

4 अनुवाद प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम

1987

दिल्ली विश्वविद्यालय
5 डिप्लोमा गुजराती भाषा

1989

दिल्ली विश्वविद्यालय
6 प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम- बांग्ला

1990

दिल्ली विश्वविद्यालय
7 डिप्लोमा – योग शिक्षा

1981

विश्वायतन योगाश्रम (भारत सरकारके नियंत्रणाधीन)

सेवा-अनुभव :-

1 केंद्रीय विद्यालय में – शिक्षक

16-11-1981 से 21-12-1982

योग प्रशिक्षण एवं हिंदी सहित अन्य विषय शिक्षण ।
2 दिल्ली सरकार के अधीन

डी.डी.ए.वी.व.मा.विद्यालय में शिक्षक।

 

31-12-1982 से 10-04-1989

योग प्रशिक्षण एवं हिंदी सहित अन्य विषय शिक्षण ।
3 हिंदी प्रध्यापक

हिंदी शिक्षण योजना, राजभाषा वि.,गृह मंत्रालय

13.4.89 से 17.7.94 व  18.1.2000 से 01.6.2005

भारत सरकार के हिंदीतर भाषी अधिकारियों कर्मचारियों को हिंदी प्रशिक्षण ।
4 अनुसंधान अधिकारी (कार्यान्वयन), राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय।

18-07-94 से

17-1-2000 तक

भारत के पश्चिमी क्षेत्र यानि गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमण, दीव व दादरा नगर हवेली स्थित भारत सरकार के कार्यालयों में भारत सरकार की राजभाषा नीति का कार्यान्वयन।
5 सहायक निदेशक

हिंदी शिक्षण योजना, राजभाषा वि.,गृह मंत्रालय

2 -6-2005 से

27-9 08 तथा

26-9-12 से

भारत सरकार के हिंदीतर भाषी अधिकारियों कर्मचारियों के  हिंदी प्रशिक्षण व उससे संबंधित व्यवस्था , प्रशासन, लेखा व प्रशिक्षण की मॉनिटरिंग का कार्य।
6 उपनिदेशक,कार्यान्वयन पश्चिमी क्षेत्र, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय।

27-9-08 से

26-9-12 तक

(प्रभारी-गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा राज्य तथा दमण एवं दीव तथा दादरा नगर हवेली।) क्षेत्र स्थित भारत सरकार के कार्यालयों में भारत सरकार की राजभाषा नीति का कार्यान्वयन।

व्याख्यान /कार्यक्रम/ संगोष्ठी :-

1 विभिन्न सरकारी/ गैर सरकारी संस्थाओं, संस्थानों में उच्च स्तरीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों का संचालन तथा  उच्च स्तरीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों, कार्यशालाओं आदि में अनगिनित व्याख्यान।
2 आकाशवाणी व दूरदर्शन पर अनेक कार्यक्रम, वार्ताएँ, साक्षात्कार , कविता, व्यंग्य आदि प्रसारित ।
3 पिछले 15 वर्षों से निरन्तर उच्च स्तरीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों, कार्यक्रमों का संचालन ।

प्रकाशन/ लेखन/ साहित्यकर्म :-

1 देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में विविध विषयों पर बड़ी संख्या में लेख प्रकाशित। हिंदी टी.वी/सिनेमा से संबंधित विषयों पर अनेक लेख प्रकाशित ।
2 अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका (विश्व हिंदी पत्रिका) राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं सहित अनेक कार्यालयीन पत्रिकाओं में भाषा, राजभाषा नीति व भाषा-प्रौद्योगिकी पर अनेक लेख प्रकाशित।
3 राजभाषा संदर्शिका का प्रकाशन ।
4 आकाशवाणी सहित अनेक मंचों पर कविता-पाठ तथा अनेक पत्र-पत्रिकाओं व वैबसाइट आदि पर कविताएं प्रकाशित।
5 कवि सम्मेलनों, काव्य गोष्ठियों में समसामयिक विषयों पर कविता पाठ ।

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