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दूसरों से सीख – डॉक्टर अरविन्द जैन भोपाल

दूसरों से सीख लेना और उससे शिक्षा लेना बहुत होशियारी हैं .इमामों ने कह दिया जिनके यहाँ निकाह में बैंड,डी जे,ढोल बजेंगे उनके यहाँ निकाह नहीं कराएँगे. बहुत अच्छी सोच की निशानी हैं इसके साथ शराब और मांस,मछली.अंडे का भी चलन  बन्द करदे तो सोने में सुहागा/ इसके पीछे मुख्य कारण अनावश्यक खर्च से बचत और इसके कारण भौंडापन भी देखने मिलता हैं . यह मुस्लिम समाज में होसकता हैं पर अन्य समाज में जहाँ सामाजिक बंधन समाप्त हो गए. सब अपनी अपनी ढपली और अपना अपना राग बजा रहे वहां नामुमकिन.

आजकल नवधनाड्य और झूठी शान दिखाने में  लाखों रुपये बर्बाद किये जाते हैं वहीँ काम हम सादगी से भी कर सकते हैं .जैन समाज ने भी नियम बनाये हैं पर उन पर चलता कौन हैं .अठारह प्रकार के आइटम्स उपयोग करो ,रात में शादी न करे और सादगी से मर्यादा के साथ शादी हो.पर दिखावा .प्रदर्शन,प्रतिस्पर्द्धा के कारण पैसे का अंधाधुंध खर्च करना कहा तक उचित हैं .सबकी शादी एक बार होती पर ऊपर कही बाते ही हम अपनाये तो बहुत कुछ हम सीमित दायरे में आ सकते हैं .

जैन समाज आज स्वछन्द समाज हो गयी ,पर उपदेश कुशल बहुतेरे . हम अमीरों को रोक नहीं सकते और गरीब अपनी सीमा में भी करे तो उचित होगा.और करते भी हैं . इस चलन ने लड़की पैदा करने में डर कामाहौल हो गया. अब सामान्य शादी दस से बीस लाख की मानी जाती हैं .जन्म से ही शादी की चिंता सताने लगती हैं .

अभी कुछ नहीं बिगड़ा, आगे जब अंतरजातीय शादी या प्रेम विवाह के कारण माता पिता के मनसूबे धुल धूसरित हो जाते हैं फिर दुखी होते हैं .समय की नजाकत समझो.देखो ,सोचो और काम करने आगे बढ़ो . कार्यान्वित करो तभी सफलता हैं .कोरे मुह चलाने से कुछ नहीं होगा.

डॉक्टर अरविन्द जैन प्रान्तीय अध्यक्ष मध्य प्रदेश लेखक प्रकोष्ठ भोपाल 09425006753

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