Breaking News

‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिल कर रहेगा पहले मातृभाषा – फिर राष्ट्रभाषा – बिजय कुमार जैन

गुवाहाटी १९ जनवरी २०१७ : ‘‘भारत की आजादी को ७० वर्ष बीत गए हैं परंतु आज तक भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है, इसका कारण क्या है ये तो हम सभी जानते हैं, पर ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का द़र्जा जरूर मिलेगा ये मेरे जीवन का ध्येय है,’’ यह भावना व्यक्त कर रहे थे ‘हिंदी वेलपेâयर ट्रस्ट’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार बिजय कुमार जैन, असम राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा आयोजित ‘हिंदी बने राष्ट्रभाषा’ अभियान सभा में, जिस सभा में पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों के भाषा प्रेमियों ने शिरकत की थी जिसमें विशेषकर मिजोरम से हिंदी अध्यापक सी. ललरम्हेता, लललूगअ, ती वानलल बुकी, बी. ललथापारी, अरुणाचल टकाम सोनिआ, नागालैण्ड-कोहिमा से बी. पी. फिलिप, तुएनसांग से नारोल चांडा, डीमापुर से हेजेतो चिशी, वोखा से टोकियेसेमा, मणिपुर से उरिक खीनबम टिकेन सिंह, थिंगड़ुजस श्याम किशोर सिंह, मेघालय, त्रिपुरा अपर व लोवर आसाम से सर्वश्री संतोष अग्रवाल, संतोष महतो विश्वनाथ चराली, दयानाथ सिंह, राजघर, डॉ. नारायण तालुकदार, डॉ. राजवीर सिंह, कामेश्वर डेका, अशोक अग्रवाल, अमूल्य बर्मन, नारायण खाकोलिया, तिनसुकिया से पूर्वी प्रकाश के संपादक गोपाल चंद्र गुप्ता के साथ सौ. मैना आभा, प्रियासखी देवी, गीतांजली मेहरा, कांता अग्रवाल आदि की उपस्थिति ने यह दर्शाया और कहा कि पूर्वोत्तर भारत की एक ही इच्छा, ‘पहले मातृभाषा फिर राष्ट्रभाषा’, इस अभियान को अब आंदोलन का रूप दें, तभी ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान प्राप्त होगा।
कोलकाता से पधारे ‘हिंदी बचाओ मंच’ के संयोजक प्रो. अमरनाथ शर्मा ने कहा कि ‘हिंदी’ को अब भारत में और टूटने ना दिया जाये, छोटी-छोटी बोलियां व भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं सूची में जोड़कर अब ‘हिंदी’ को टुकड़े-टुकड़े ना किया जाये, जिसके लिए हमने दिल्ली स्थित जंतर-मंतर में १५ जनवरी २०१७ को धरना देकर भारत सरकार को ज्ञापन भी दिया कि ‘हिंदी’ को अब राष्ट्रभाषा का सम्मान दिया जाये, जब तक यह नहीं होता, भारत के किसी भी प्रदेश की बोलियां या भाषा को आठवीं अनुसूची में दर्ज न किया जाये और यदि ऐसा होता है तो हम भाषा प्रेमियों पर कुठाराघात होगा।
‘पूर्वांचल प्रहरी’ के सम्पादक जी. एल. अग्रवाला ने कहा कि मैं बिजय कुमार जी को वर्षों से जानता हूँ, उन्हीं के द्वारा सम्पादित ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका का पाठक भी हूँ, बिजय जी की सोच व कार्य अभिनंदनीय है और मैं आज इस मंच से कहता हूँ कि ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का द़र्जा प्राप्त होना ही चाहिए।
असम राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के महामंत्री क्षीरदा कुमार शइकिया ने कहा कि ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का द़र्जा मिलना ही चाहिए, जिसकी हिंदी अधिकारिणी है, बहुत ही दुःख है कि विश्व में सम्मानित हो रहा ‘भारत’, जिसकी अपनी कोई राष्ट्रभाषा नहीं है, हम सभी पूर्वोत्तर भारत के रहवासी बिजय जी की भावनाओं के साथ हैं और आप सभी से निवेदन करता हूँ कि भारी संख्या में ३० जनवरी २०१७ को महात्मा गांधी जी की पुण्य तिथि पर राजघाट दिल्ली पहुंचे।
मंच पर उपस्थित सभी वक्ताओं ने अपनी-अपनी बात कही, श्रोताओं व भाषाविदों ने भी यह कहा कि हमें पता तक नहीं था कि ‘हिंदी’ राष्ट्रभाषा नहीं है, यह तो सोचनीय विषय ही नहीं, इसके लिए हमें कुछ करने की जरूरत है। बिजय कुमार जैन ने अपनी चिर-परिचित शैली में कहा कि जब तक ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का खिताब नहीं मिलेगा, मैं चैन से नहीं बैठूंगा, क्योंकि मेरे जीवन का ध्येय ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाना है और वह पूरा करके ही रहूँगा। सभा का समापन राष्ट्रगान से हुआ।
-मैभाहूँ

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *