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आचार्य श्री पुष्पदन्तसागर जीवनचरित्र

प.पूज्य करुण वात्सल्य रत्नाकर ‘जैन एकता’ में प्रयासरत
आचार्य श्री पुष्पदन्तसागर
जीवन चरित्र
गृहस्थ शुभ नाम : सुशील जैन
(जन्म तिथि) : १ जनवरी १९५४
जन्म स्थली : गोंदिया (महाराष्ट्र)
माता का नाम : श्रीमती मथुराबाई
पिता का नाम : श्री कोमलचंद जी जैन
़कुल बंधु : छ: भाई
कुल बहन : चार बहनें
पठन (शिक्षा) : बी.ए,.बी.एस.- सी. १ेू ब्r. एम.ए., एल.एल.बी.
इतिहास प्रथम वर्ष
क्षुल्लक दीक्षा : २ नवम्बर १९७८, सिद्धक्षेत्र नैनागिरि
दीक्षा गुरु : आचार्य श्री १०८ विद्यासागरजी महाराज
मुनि : ३१ जनवरी १९८० बालबेहट (उ.प्र.)
दीक्षा गुरु : आचार्य श्री १०८ विमलसागरजी महाराज
आचार्य पद : २१ मार्च १९८६ इन्दौर
गुरु श्री : आचार्य श्री १०८ विमलसागरजी महाराज
अद्वितीय कृत्तियाँ : मृत्युन्जयी प्रवचन / मैं दीवानी तेरे नाम की / मेघ समाना मोती भाग १,२,३,४ / बोधि सुमन / बोधि वृक्ष / झीनी हो गई चुनरियाँ / तत्वावतार / प्रश्न आज के? / वाणी के पूâल / शूल और पूâल / परिणामों के खेल / परमात्मा के सुमन / हम दुखी क्यों / मृत्यु के दीये में जीवन की ज्योति / शिक्षा के सुमन / अनोखे तेरे खेल / कितनी झुठी कितनी सच्ची / बनो तुम भी वैसे जैसा मैं हूँ / भाग्य और पुरुषार्थ / महावीर और महाविकास / गणतन्त्र नहीं गुणतन्त्र / कौमी एकता / पथ के प्रदीप / जिज्ञासा के वृक्ष समाधान के फल / सेवा हमारी भाषा / प्रवेश द्वार / निश्चय नहीं निष्कर्ष कहो / तोड़ना नहीं जोड़ना सिखो / ज्ञान / मृत्यु / बैल छोड़ दो घास खाने / कलम और मलहम के डॉक्टर / सौरभ के सुमन / प्रवचन प्रवाह और गुण स्थान / खिला गुलाब / पूâटी आँख / मौन क्यों / पूâटी आँक विवेक की / भक्ति रागी प्रेम / पदकांक्षा की अन्धी दौड़ / कब अन्तर दीप जले / समाधान / रक्षाबन्धन / मन्त्र शक्ति / अध्यात्म और विज्ञान / वाणी का सौंदर्य—मन्त्री / मुक्ति दिवस / जिया कब तक उलझेगा / एक गिलास पानी / ममता सूख गई / चिन्तन के सुमन / धर्म कान्ति के सोपान / प्रज्ञा का कल्प वृक्ष / शीशी छोटी मछली मोटी / डावूâ के भीतर साधू / ममता नहीं समता / ज्ञान का वरदान / आओ लोट चलें / रोगों का घर / रंगाई से पहले धुलाई / प्रेम की पुâहार / साधु,समाज और राष्ट्र / श्रद्धा की आँखे / गलत फहमी / श्रुति पथ / तीस मिनिट / शास्त शासक शासन / चल हंसा उस पार / शब्दन चोट करी / शबदम अमृत झरें / शब्द भये सयाने / बोध का जागरण / ज्ञान सूत्र / पुष्प वर्षा १५ भाग / अमृत वाणी १६ भाग / जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि ८ भाग / कारगार / बिन्दु में सिन्धु / सिंहनाद / आदि लगभग १७५ पुस्तवेंâ प्रकाशित हैं। वर्तमान श्रमणों में सर्वाधिक प्रकाशन
कवितायें मुक्तक एवम् दोहे
मन अन्जन, शब्दांकन, प्रज्ञा प्रसून, क्षण-क्षण प्रति क्षण, मार्ग दो मैं एक, मुक्ति का मार्ग, अध्यात्म के स्वरों में, पत्थर मत मारों दर्पण में, अरिहन्त दोहावली, अनुभूति के सुमन, मुक्त विद्या, तेरी जीत पराजय मेरी, एक पूâल अनेक पांखुड़ी एवम् प्रेम का सन्चार।
आचार्य श्री पुष्पदन्तसागर वर्षायोग
१९८० छिंदवाड़ा, १९८१ छिंदवाड़ा (म.प्र.), १९८२ रायपुर (म.प्र.), १९८३ राजिम (म.प्र.), १९८४ दुर्ग (म.प्र.), १९८५ सिवनी (म.प्र.), १९८५ गोम्मटगिरि इन्दौर, १९८७ बागीदौरा (राज॰), १९८८ परतापुर (राज.), १९८९ नौगामा (राज.), १९९०-९१ प्रतापगढ़ (राज.), १९९२ किशनपुरा इन्दौर, १९९३ भिन्ड (म.प्र.), १९९४ इटावा (उ.प्र.), १९९५ कानपुर (उ.प्र.), १९९६ मरादाबाद (उ.प्र.),, १९९७ मुजफ्फरनगर (उ.प्र.), १९९८ इन्दौर (म.प्र.), १९९९ अम्बाला (हरियाणा), २००० दिल्ली। २००१ कोलकात्ता (प.बं.), २००२ आकोला (महाराष्ट्र), २००३ मुम्बई (महाराष्ट्र), २००४ मुम्बई (महाराष्ट्र), २००५ नलबाड़ी (आसाम), २००६ डीमापुर (नागालैण्ड), २००७ गौहाटी (आसाम), २००८ दिल्ली (राजधानी), २००९ मुम्बई (महाराष्ट्र), २०१० पुष्पगिरि, २०११ पुष्पगिरि, २०१२ पुष्पगिरि, २०१३ पुष्पगिरि, २०१४ पुष्पगिरि, २०१५ पुष्पगिरि,२०१६ पुष्पगिरि, इन्दौर (मध्यप्रदेश)
– जिनागम

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