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मैं बिजय कुमार जी के वक्तव्य से पूर्ण रुप से सहमत हूँ – डाँ. रवीन्द्र नागर (एम.ए.आचार्य, पी.एच.डी., डी.,डी.लिट, प्राचार्य- संस्कृत, भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली)

दिल्ली: ‘हिंदी’ हमारे भारत की राजभाषा (राष्ट्रभाषा) बहुत ही संकट के दौर पर गुजर रही है जिसका मुझे बहुत ही दु:ख है, पीड़ा है, मैं पूर्ण रुप से ‘हिंदी प्रेमी’ बिजय कुमार जी जैन के वक्तव्य से सहमत हूँ। बिजय कुमार जी से जब मेरी मोबाइल पर बात हुई और इनकी ओजपूर्ण भावना सुनकर मन में हुआ कि बिजय कुमार जी के जरुर दर्शन करुँ जब कि उम्र के इस पड़ाव पर मेरे निवास रोहिणी से आना बहुत ही मुश्किल था पर ‘हिंदी’ प्रेम ने यहां १०२ साल पुरानी मारवाड़ी पुस्तकालय चांदनी चौक खींच लाया, आज ‘हिंदी राष्ट्रभाषा अभियान’ मंच से इतना जरुर कहूँगा कि ‘हिंदी’ की जो दशा आज हो रही है उसके दोषी हम सभी हैं, मैं तो स्वयं चाहता हूँ कि ‘प्रधानमंत्री समन्वय समिति’ का मैं भी एक सिपाही बनूं और भारत की ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान मिले, इसके लिए कार्य कर सवूâँ।
…जा के दुनिया से कह दो कि मैं ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान दिला के ही भारत की पावन भूमि से वूâच करुँगा -बिजय कुमार जैन (वरीष्ठ पत्रकार व संपादक)
‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान मिले, जुनून से भरे बिजय कुमार जैन ने २३ मार्च २०१७, शहीदी दिवस के उपलक्ष्य पर एशिया की सबसे पुरानी पुस्तकालय, जहां करीब ३५,००० पुस्तकों का विशाल संग्रह है, आयोजित ‘हिंदी बने राष्ट्रभाषा’ अभियान सभा मेंं अपने ओजपूर्ण वक्तव्य द्वारा कहा कि ‘दुनिया वालों मैं तो मेरी माँ भारत का दामन तब ही छोड़कर इस दुनिया से वूâच करुँगा जब मेरी माँ भारत को जुबान स्वरुप ‘हिंदी’ मिलेगी’ हमारे भारत के पंतप्रधान नरेंद्र मोदी को जो सम्मान प्राप्त हुआ है वह ‘हिंदी’ की ही देन है और श्री मोदी ही ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलायेंगे, साथ यह भी कहना चाहता हूँ कि ‘हिंदी’ को बदनाम करने का प्रयास अब ना करें, चाहे वो भारत के राजभाषा अधिकारी हों, हिंदी का व्यापार करने वाले सुन व समझ लें कि
‘हिंदी’ पर अत्याचार बहुत हो गया
अब ‘हिंदी’ का ना करें ओद्दा व्यापार
‘हिंदी’ चाहती है दिलाएं उसे अपना सम्मान
भारत की राष्ट्रभाषा बनने का ‘हिंदी’ को ही है अधिकार
‘मारवाड़ी पुस्तकालय’ के मंत्री राजनारायण सर्राफ ने कहा कि मुझे तो पता ही नहीं था कि ‘हिंदी’ राष्ट्रभाषा नहीं है हम तो यही जानते थे कि भारत की राष्ट्रभाषा ‘हिंदी’ है पर इसे संवैधानिक द़र्जा प्राप्त नहीं हो पाया, जिसका हमें दु:ख है।
सभा में छात्र, उद्योगपति, राजनीतिज्ञ, समाज सेवी, आर.टी.आई. एक्टिविस्ट के साथ सर्वश्री बिपिन चंद्र गुप्ता (सम्पादक नेशनल एक्सप्रेस), पवन भूत (सम्पादक पुलिस पब्लिक), सुरेश सिंहानिया, अशोक तुलस्यान, सरला माहेश्वरी, नेहा सैनी, कामरान, राकेश, डॉ. ओंकार मित्तल, राखी गुप्ता, सौरभ गर्ग, मनीषा, विजय विद्रोही, मुन्ना कुमार, नवीन गर्ग, आदित्य, गौरव चौधरी, नीशा वंâदपाल, अंकित कुमार, केशव धर्मा, इसलाम, रविंद्र बदयाला, ब्रह्मानंन्द झा, चन्द्रकांता सिवाल, चंद्रेश आदि उपस्थित थे। करीब २ घंटे चली सभा का उद्घाटन मां सरस्वती की पूजा के साथ हुआ और समापन राष्ट्रगान से हुआ।
-मैंभाहूँ

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