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वर्ष २०१७ में ‘जैन एकता’ का जयघोष हो

वर्ष २०१७ के शुभागमन पर प्रण लें कि हम ‘समय’ को व्यर्थ नहीं गवाएंगे, क्योंकि समय की धूरी रूकती नहीं, चलती ही रहती है, इसीलिए कहा गया है कि ‘काल करे सो आज कर’ मतलब जो भी कार्य करना है वह आज ही करें, ये ना सोचें कि वर्ष २०१६ बीत गया, वर्ष २०१७ पूरा वर्ष बाकी है, अभी तो मात्र शुरुआत ही हुई है, ऐसी सोच रखने वाले अपने अमूल्य जीवन का नुकसान ही करेंगे, ऐसा मैं कह सकता हूँ। वर्ष २०१६ तो जैसे-तैसे बीत ही गया, अब २०१७ हमारे प्रभु तीर्थंकर देवों का जैन धर्म व समाज मजबूत हो, चारों और अहिंसा का वातावरण बना रहे, जैन समाज में एकता की भावना बलवति हो, हम चाहे जिस भी पंथ से हों वैसे ही रहें पर ‘जैन’ बनें, तब ही हम आधुनिक युग में अपना परिचय बनाये रख पायेंगे, नहीं तो भाग रहे समय के पीछे रह जायेंगे, समय के अनुसार ही चलने वाला व्यक्ति समाज व देश में अपना परिचय स्थापित कर पाता है। मेरे सभी आराध्य गुरू-भगवंतों के पावन चरणों में नमन होते हुए विनंति करता हूँ कि ‘जैन एकता’ के लिए एक विश्वस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन करें, ताकि पूरे विश्व में हमारी, पहचान बनी रहे, क्योंकि अहिंसा के पथ पर चलने वाला ‘जैन’ ही होता है और अिंहसा ही विश्व को खुश व समृद्ध रख सकती है।
‘जैन एकता’ मेरे जीवन का उद्देश्य है जिसे आज की युवा पीढ़ी ने समझा और अपनाया भी है, अब कहने लगे हैैं आज के युवा कि ‘ना हम दिगम्बर हैं ना ही हम श्वेताम्बर’ हम तो बस ‘जैन’ हैं, भगवान महावीर के अनुयायी है, अहिंसा के पुजारी हैं।
वैâसे भी बता दूँ कि हम जैन मृदुल भाषी है, अपनी प्यारी सी जुबान से कभी किसी का दिल नहीं दुखाते, इसलिए वर्ष २०१७ की शुरुआत पर एक प्रण जरूर लें कि हम जैन ‘एक’ रहकर विश्व में अहिंसा का जयघोष करेंगे और अपनी पावन संस्कृति से पूरे विश्व को परिचय करायेंगे, ऐसे विश्वास के साथ सबका भला हो, सब खुश रहें और वर्ष २०१७ में कुछ नया करें, ‘एकता’ के कीर्तिमान स्थापित करें, ऐसी मनोभावना के साथ..
जय जिनेन्द्र

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